Love is life

 कभी फुर्सत हो तो देखो , अपना गुज़रा ज़माना | 

मुहबब्त की वो बातें ,चिड़ियों का चहचहाना || 


ना थी कोई बंदिशें ,ना हीं था कोई फ़साना | 

मर्जी का ही था आना ,मर्जी का ही था जाना || 


स्कूल की वो घन्टी , अंतहीन दोस्तों की बाते | 

झूठे ही रूठ जाना , पर सच्चा था वो मनाना|| 


हर राह में थी कलीयां ,बागन था हर मुहल्ला | 

शबनम के थे ये आँसू ,कलियों का मुस्कुराना || 


लगती थी चोट जब भी ,आती थी याद अम्मा | 

वो मुस्कुराते रहना ,आँसूओं का भी छुपाना || 


अम्मा की प्यारी मूरत ,बाबूजी की वो सूरत | 

आबाद जिसके दम से था ,मेरा वो आशियाना || 


आती नहीं है गोया क्यों, अब आँगन में भी मेरे | 

बदली है क्यों फिजायें , बदला है क्यों ज़माना || 


जीवन बहुत है छोटा ,कुछ खो गया है इसमें | 

सब खोजते है अब तो ,खुशियों का ही ठिकाना || 


ख़ुद खो गया है खोजी ,ये खोज भी गज़ब है | 

चन्द कहकहों के खातिर,भटका कहाँ कहाँ ना ||



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